उदयपुर को "झीलों की नगरी" कहा जाता है और यहां स्थित सिटी पैलेस को राजस्थान की सबसे भव्य धरोहरों में गिना जाता है। यह महल न केवल अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है बल्कि इसमें छिपा शाही वैभव और ऐतिहासिक धरोहर इसे और भी खास बनाता है। झील पिछोला के किनारे स्थित यह विशाल महल बाहर से जितना आकर्षक है, अंदर से उतना ही रहस्यमयी और खूबसूरत दिखाई देता है। आइए जानते हैं कि सिटी पैलेस के भीतर आपको कौन-कौन से दर्शनीय स्थल देखने को मिलते हैं और इसकी विशेषताएं क्या हैं।
भव्य प्रवेश द्वार – गणेश देवड़ा और बड़ा पोलसिटी पैलेस के अंदर प्रवेश करते ही सबसे पहले नजर आती है इसकी ऊंची और मजबूत द्वार प्रणाली। "बड़ा पोल" और "गणेश देवड़ा" जैसे विशाल गेट राजपूताना स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इन्हें देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस समय सुरक्षा और शान-शौकत दोनों का कितना ध्यान रखा जाता था।
दीवान-ए-आम और दीवान-ए-खासमहल के अंदर जाते ही दर्शकों का ध्यान सबसे पहले आकर्षित करता है दीवान-ए-आम, जहां आम जनता के लिए दरबार लगाया जाता था। इसकी दीवारों पर की गई नक्काशी और रंगीन कांच की खिड़कियां अद्भुत लगती हैं। इसके बाद आता है दीवान-ए-खास, जहां महाराजा अपने खास मेहमानों और दरबारियों से मुलाकात करते थे। यहां की भव्यता आज भी वैसी ही बरकरार है।
मोर चौक – रंगीन कांच और मोर आकृतियों का संगमसिटी पैलेस का सबसे आकर्षक स्थल है मोर चौक। यहां दीवारों पर बनाए गए रंगीन कांच के मोर इतने जीवंत लगते हैं कि हर कोई इन्हें देखकर मंत्रमुग्ध हो जाता है। इस हिस्से का निर्माण कला और शिल्प का अद्भुत नमूना है। कहा जाता है कि यहां चार मौसमों को दर्शाने वाले अलग-अलग मोर बनाए गए हैं।
जेनाना महल और मर्दाना महलमहल के अंदर स्थित जेनाना महल रानियों और राजघराने की महिलाओं का निवास स्थान था। यहां की झरोखों से पिछोला झील का नजारा किसी स्वप्न जैसा प्रतीत होता है। वहीं, मर्दाना महल राजाओं और शहजादों के लिए था, जिसकी दीवारों पर युद्ध और शिकार से जुड़ी पेंटिंग्स आज भी गौरवशाली इतिहास की झलक दिखाती हैं।
रंग महल और कांच महलमहल का एक अन्य हिस्सा है रंग महल, जहां की दीवारें रंग-बिरंगी पेंटिंग्स और प्राकृतिक रंगों से सजाई गई हैं। इसके अलावा कांच महल अपनी जटिल कांच की सजावट और झूमरों के लिए प्रसिद्ध है। जब सूर्य की किरणें इन कांचों पर पड़ती हैं, तो पूरा हॉल जगमगाने लगता है।
भव्य आंगन और संग्रहालयसिटी पैलेस के भीतर कई विशाल आंगन हैं, जहां कभी शाही आयोजनों और जुलूसों का आयोजन होता था। आज इनमें से कई हिस्से को संग्रहालय में बदल दिया गया है। यहां पुराने हथियार, शाही पोशाकें, राजघराने की पेंटिंग्स और ऐतिहासिक दस्तावेज़ देखने को मिलते हैं। यह संग्रहालय पर्यटकों को मेवाड़ की संस्कृति और शौर्य गाथाओं से जोड़ता है।
पिछोला झील का नजारामहल के अंदर से झरोखों और बालकनियों से पिछोला झील का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है। यह नजारा इतना खूबसूरत होता है कि लगता है जैसे झील और महल दोनों एक-दूसरे के लिए ही बने हों। विशेष रूप से सूर्यास्त के समय यहां का दृश्य अद्भुत होता है।
सिटी पैलेस की वास्तुकलाअंदर से सिटी पैलेस की संरचना में राजपूत, मुगल और यूरोपीय स्थापत्य कला का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। ऊंची दीवारें, संगमरमर की नक्काशी, कांच की सजावट और रंगीन झरोखे इसे विशिष्ट पहचान देते हैं। महल का हर कोना राजघराने की समृद्धि और गौरवशाली अतीत की कहानी कहता है।
महल के मंदिरसिटी पैलेस के अंदर कई मंदिर भी बने हुए हैं, जिनमें जगदीश मंदिर सबसे प्रसिद्ध है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और अपनी शिल्पकला और आध्यात्मिक वातावरण के लिए जाना जाता है।
वर्तमान स्वरूप और पर्यटनआज सिटी पैलेस का एक हिस्सा मेवाड़ राजपरिवार के पास है, जबकि दूसरा हिस्सा पर्यटकों के लिए संग्रहालय और पर्यटन स्थल के रूप में खोला गया है। यहां हर साल देश-विदेश से लाखों पर्यटक आते हैं। शादी, फोटोग्राफी और फिल्म शूटिंग के लिए भी यह महल बेहद लोकप्रिय है।