पटना, 30 अगस्त (Udaipur Kiran) । बिहार के सीवान में 9 साल पहले हुये पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड में सीबीआई की विशेष अदालत ने शनिवार को फैसला सुना दिया। अदालत ने तीन आरोपियों को बरी कर दिया है, जबकि तीन अन्य को दोषी करार दिया है।
सीबीआई की विशेष अदालत ने जहरुद्दीन बेग ऊर्फ लड्डन मियां, राजेश कुमार और रिशु कुमार जायसवाल को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है, जबकि मामले के अभियुक्त विजय कुमार गुप्ता, सोनू कुमार गुप्ता और रोहित कुमार सोनी को राजदेव रंजन की हत्या का दोषी करार दिया है।तीनों दोषियों को 10 सितम्बर को सजा सुनाई जाएगी
जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-3 नमिता सिंह की विशेष सीबीआई अदालत ने शनिवार का फैसला सुनाया। बचाव पक्ष के वकील शरद सिन्हा ने बताया कि अदालत ने लड्डन मियां, राजेश कुमार और रिशु कुमार जायसवाल को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है, जबकि विजय कुमार गुप्ता, सोनू कुमार गुप्ता और रोहित कुमार सोनी को राजदेव रंजन की हत्या का दोषी करार दिया है।
सीबीआई के अधिवक्ता राकेश दुबे ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हम इस निर्णय के खिलाफ उच्च न्यायालय जाएंगे।
राजदेव रंजन की पत्नी ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, रिशु बाइक चला रहा था और दूसरे ने शूट किया था, तो कैसे बरी हो गया। इसके खिलाफ मैं ऊपरी अदालत (अपर कोर्ट) में जाऊंगी। मैं सरकारी वकील के नम्बर पर तुरंत फोन कर पूरी जानकारी लेकर अपर कोर्ट में जाऊंगी।
दरअसल, 13 मई 2016 को एक दैनिक अखबार के ब्यूरो चीफ राजदेव रंजन की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वारदात वाले दिन राजदेव रंजन कार्यालय का काम खत्म करने के बाद अपने किसी रिश्तेदार को देखने के लिए अस्पताल गए थे। वहां से लौटने के दौरान बदमाशों ने उनके ऊपर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी थी। इस घटना में राजदेव को दो गोलियां लगीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी।
इस घटना को लेकर राजदेव रंजन की पत्नी आशा यादव ने नगर थाना में केस दर्ज कराया। राजदेव रंजन की हत्या के पीछे सीवान के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन का नाम खूब उछला था और इसके पीछे उनका हाथ होने की आशंका जताई जा रही थी। इस केस में मुख्य आरोपित सीवान के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन की कोरोना काल में मृत्यु हो चुकी है। वहीं, छह अन्य आरोपित ट्रायल का सामना कर रहे थे। 6 आरोपियों में अजहरूद्दीन उर्फ लड्डन मियां, रोहित कुमार सोनी, विजय कुमार गुप्ता, सोनू कुमार गुप्ता, राजेश कुमार और रीशु कुमार जायसवाल शामिल हैं।
आरोपितों में से विजय कुमार गुप्ता जमानत पर है, जबकि अन्य आरोपित जेल में बंद हैं। एक अन्य आरोपित को अदालत ने किशोर घोषित कर चुकी है और उसके मामले की सुनवाई विशेष बाल न्यायालय में जारी है। करीब 09 साल तक चले इस सेशन-ट्रायल में सीबीआई ने 69 गवाहों के बयान दर्ज कराए, साथ ही 111 भौतिक साक्ष्य अदालत में पेश किए।
इस दौरान आरोपियों से पूछताछ के दौरान 183 प्रश्न पूछे गए। पहले यह मामला पटना स्थित विशेष कोर्ट (एमपी/एमएलए मामलों) में भेजा गया था, जिसे बाद में मुजफ्फरपुर की विशेष सीबीआई अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया था।
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(Udaipur Kiran) / गोविंद चौधरी
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