शिमला, 30 अगस्त (Udaipur Kiran) । हिमाचल प्रदेश में मॉनसून लगातार तबाही मचा रहा है। बादल फटने, भूस्खलन और भारी बारिश से प्रदेश के कई जिलों में हालात बिगड़े हुए हैं। जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार शनिवार सुबह तक प्रदेश में 3 राष्ट्रीय राजमार्गों सहित 557 सड़कें बंद रहीं। बिजली और पेयजल आपूर्ति भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। मौसम विभाग ने आज और कल भारी से बहुत भारी वर्षा का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
मंडी में बादल फटा, दुकानों व इंडस्ट्री को नुकसान
मंडी जिला में गोहर थाना अंतर्गत नांडी पंचायत में बीती देर रात बादल फटने के बाद कटवांढ़ी नाले में सैलाब आ गया। इस आपदा में 4 दुकानें, एक कार और एक इंडस्ट्री बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। कट स्टोन की इंडस्ट्री पूरी तरह से नष्ट हो गई, जबकि 4 दुकानों में पानी और मलबा भर गया। राहत की बात यह रही कि किसी तरह का जानी नुकसान नहीं हुआ। वहीं चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे फिर से भूस्खलन के कारण बंद हो गया। खोतीनाला के पास पहाड़ गिरने से हाईवे पर भारी मलबा आ गया। पुलिस कर्मियों की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया क्योंकि समय रहते वाहनों को रोक दिया गया था। हाईवे की बहाली में समय लग सकता है।
शिमला के रामपुर में 5 मकान क्षतिग्रस्त, पिता-पुत्र घायल
शिमला जिला के रामपुर में दो जगहों पर भूस्खलन हुआ। पटवार वृत देवठी के गांव शील प्रोग में तीन मकान क्षतिग्रस्त हो गए। तुलसी दास, लेखराज और हरीश कुमार के घरों को भारी नुकसान हुआ। वहीं गांव थाला में गोपी चंद और प्यारे लाल के मकान ढह गए। इस हादसे में प्यारे लाल और उनके बेटे हेमंत घायल हो गए। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।
चंबा में सड़कें बंद, मणिमहेश यात्रियों का रेस्कयू जारी, सीएम पहुचेंगे चम्बा
चंबा जिला में भारी बारिश के कारण हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। जिले की करीब 300 सड़कें अभी भी बंद हैं। 400 ट्रांसफार्मर ठप हैं और 150 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। मणिमहेश यात्रा के दौरान फंसे श्रद्धालुओं का रेस्क्यू अभियान तेज किया गया है। देर रात तक करीब 4 हजार यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया। इन्हें पठानकोट भेजा जा रहा था लेकिन चंबा-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने से यात्री बीच रास्ते में रुक गए। आज मौसम थोड़ा साफ होने पर रेस्क्यू में तेजी लाई जाएगी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू आज दिल्ली से चंबा पहुंचेंगे। वे भरमौर और मणिमहेश का हवाई सर्वे कर प्रभावितों से मिलेंगे और राहत कार्यों की समीक्षा करेंगे।
कांगड़ा व सिरमौर में शिक्षण संस्थान बंद
कांगड़ा जिला में पौंग बांध का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर है। हालांकि बांध से पानी छोड़ने के बाद धीरे-धीरे जलस्तर में कमी आ रही है। फतेहपुर और इंदौरा उपमंडल में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं और प्रशासन लगातार रेस्क्यू अभियान चला रहा है। वहीं कांगड़ा और सिरमौर जिलों में आज सभी शिक्षण संस्थान बंद रखे गए।
बिजली और पेयजल योजनाएं ठप
राज्य आपदा प्रबंधन केंद्र के अनुसार कुल 936 बिजली ट्रांसफार्मर और 223 पेयजल योजनाएं ठप हो चुकी हैं। मंडी में 213 सड़कें और 651 ट्रांसफार्मर बंद पड़े हैं। कुल्लू में 160 सड़कें और 189 ट्रांसफार्मर ठप हैं। सिरमौर में 38 सड़कें और 40 ट्रांसफार्मर बंद हैं। शिमला में 28 सड़कें और 52 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं, जबकि कांगड़ा और हमीरपुर में भी कई पेयजल स्कीमें बंद हैं।
अब तक 317 मौतें, 2,774 करोड़ का नुकसान
इस मानसून सीजन में प्रदेश में अब तक 317 लोगों की मौत हो चुकी है। 40 लोग लापता हैं और 374 लोग घायल हुए हैं। मंडी में 51, कांगड़ा में 49, चंबा में 36, शिमला व किन्नौर में 28-28 और कुल्लू में 26 मौतें दर्ज हुई हैं। 3,889 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं जिनमें 795 पूरी तरह ध्वस्त हो गए। 466 दुकानें और 3,486 पशुशालाएं नष्ट हो चुकी हैं। 1,865 पालतू पशु और 25,755 पोल्ट्री पक्षियों की मौत हो चुकी है। अब तक प्रदेश को 2,774 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है।
42 बार फट चुके हैं बादल, फ्लैश फ्लड की 90 घटनाएं
प्रदेश में इस बरसात के दौरान 90 फ्लैश फ्लड, 87 भूस्खलन और 42 बादल फटने की घटनाएं हो चुकी हैं। लाहौल-स्पीति में 52 फ्लैश फ्लड, कुल्लू में 15, शिमला में 14 और मंडी में 12 भूस्खलन दर्ज हुए हैं। मंडी जिले में अब तक 18 बार बादल फटने की घटनाएं हो चुकी हैं।
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(Udaipur Kiran) / उज्जवल शर्मा
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