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बलुचिस्तान में आज भी जारी है स्वतंत्रता की जंग: मुख्यमंत्री

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– मुख्यमंत्री डॉ. सरमा ने जताई संवेदना

गुवाहाटी, 28 अप्रैल . असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने बलुचिस्तान के स्वतंत्रता संग्राम के प्रति अपनी गहरी संवेदना और समर्थन व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि बलुचिस्तान का स्वतंत्रता संग्राम 1947-48 से प्रारंभ हुआ था, जब ब्रिटिश उपनिवेशवाद के अंत के बाद, वर्तमान बलुचिस्तान के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाला कालात रियासत अपने सार्वभौमिकता को बनाए रखने के लिए संघर्ष में उतर पड़ा था.

मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया कि 1948 के मार्च में पाकिस्तान ने बलपूर्वक इस क्षेत्र का अधिग्रहण कर लिया, जिससे बलुच जनता के बीच आक्रोश की जड़ें गहरी हो गईं. डॉ. सरमा ने कहा कि विगत दशकों में राजनीतिक उपेक्षा, आर्थिक शोषण और सांस्कृतिक दमन ने बलुच जनमानस के भीतर विद्रोह को बार-बार भड़काया है, खासकर 1958, 1962, 1973 और 2000 के दशक की शुरुआत में.

प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद, बलुच जनता लंबे समय से पिछड़ेपन और सरकारी शोषण का सामना कर रही है. 2006 में जनजातीय नेता नवाब अकबर बुगती की हत्या को उन्होंने इस संघर्ष का एक दर्दनाक अध्याय बताया, जिसने बलुच अधिकारों और न्याय की मांग को और प्रासंगिक बना दिया.

डॉ. सरमा ने कहा कि आज का बलुचिस्तान आंदोलन स्वाभिमान, अधिकार, सम्मान और भविष्य की सुरक्षा के लिए चल रहा एक जीवंत उदाहरण है. उन्होंने बलिदान, अडिग साहस और स्वतंत्रता की उत्कट चाहत से भरे इस संघर्ष के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त की और उम्मीद जताई कि यह आंदोलन अपने उचित परिणाम तक शीघ्र पहुंचेगा.

/ श्रीप्रकाश

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